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	<title>जीवनशैली &#8211; Herald Scoop | हेराल्ड स्कूप</title>
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	<title>जीवनशैली &#8211; Herald Scoop | हेराल्ड स्कूप</title>
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		<title>क्या आपको भी होता है किडनी के पास दर्द? </title>
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		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 05:17:46 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="1073" height="549" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/3-19.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/3-19.jpg 1073w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/3-19-768x393.jpg 768w" sizes="(max-width: 1073px) 100vw, 1073px" />
<p>किडनी कैंसर और किडनी स्टोन दोनों ही किडनी से जुड़ी बीमारियां हैं। हालांकि, ये दोनों बिल्कुल अलग-अलग समस्याएं हैं, लेकिन इनके कुछ लक्षण एक जैसे हो सकते हैं। इसी वजह से बिना डॉक्टरी जांच के इनमें फर्क कर पाना कई बार बहुत मुश्किल हो जाता है।</p>



<p>एंड्रोमेडा कैंसर अस्पताल की कंसल्टेंट (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी) डॉ. पर्ल आनंद के अनुसार, इन दोनों बीमारियों के अंतर को समझना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते सही इलाज मिल सके। आइए, आज World Kidney Cancer Day के मौके पर जानते हैं कि आप किडनी स्टोन और किडनी कैंसर के बीच का फर्क कैसे पहचान सकते हैं।</p>



<p><strong>किडनी स्टोन क्या है और कैसे दिखते हैं इसके लक्षण?<br></strong>किडनी स्टोन असल में मिनरल्स और नमक के ठोस टुकड़े होते हैं, जो किडनी के अंदर बन जाते हैं।</p>



<p>जब किसी को पथरी होती है, तो उसे पीठ, कमर के साइड में या पेट के निचले हिस्से में अचानक और बहुत तेज दर्द होता है। यह दर्द लहरों की तरह आता-जाता रहता है। इसके अलावा कुछ और लक्षण भी दिख सकते हैं, जैसे:</p>



<p>जी मिचलाना और उल्टी आना।<br>पेशाब करते समय जलन महसूस होना।<br>पेशाब में खून आना।</p>



<p>अगर पथरी छोटी है, तो वह अक्सर अपने आप पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है, लेकिन बड़ी पथरी के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती है।</p>



<p><strong>किडनी कैंसर कैसे अलग है?<br></strong>दूसरी तरफ, किडनी कैंसर तब होता है जब किडनी में असामान्य कोशिकाएं अनियंत्रित होकर तेजी से बढ़ने लगती हैं।</p>



<p>सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि शुरुआती स्टेज में किडनी कैंसर का कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देता। कई बार तो इसका पता अचानक तब चलता है, जब किसी और वजह से इमेजिंग टेस्ट करवाए जाते हैं। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, ये लक्षण सामने आ सकते हैं:</p>



<p>पेशाब में खून आना।<br>कमर के साइड या पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द रहना।<br>बिना किसी कारण के वजन कम होना।<br>बहुत ज्यादा थकान और बुखार रहना।<br>पेट में किसी गांठ का महसूस होना।</p>



<p><strong>दर्द से समझें दोनों के बीच का सबसे बड़ा अंतर<br></strong>अगर आप कन्फ्यूज हैं, तो ‘दर्द का तरीका’ दोनों के बीच एक बहुत बड़ा अंतर बता सकता है:</p>



<p>पथरी का दर्द: यह एकदम अचानक उठता है, बहुत तेज होता है और रुक-रुक कर आता है।<br>कैंसर का दर्द: यह दर्द हल्का, लेकिन लगातार बना रहता है, और समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।</p>



<p>यह सच है कि पेशाब में खून दोनों ही बीमारियों में आ सकता है, लेकिन अगर इसके साथ बिना किसी कारण के तेजी से वजन गिर रहा है और लगातार थकान बनी हुई है, तो यह कैंसर का इशारा हो सकता है।</p>



<p><strong>सही जांच है बेहद जरूरी<br></strong>चूंकि दोनों बीमारियों के कई लक्षण आपस में मिलते-जुलते हैं, इसलिए अगर आपको पेशाब से जुड़ी कोई भी लगातार बनी रहने वाली समस्या हो या पेशाब में खून दिखे, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।</p>



<p>डॉक्टर सही बीमारी का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और लेबोरेटरी टेस्ट की मदद लेते हैं। सही जांच के बाद ही वह आपको एक सही इलाज की सलाह दे सकते हैं।</p>
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		<title>क्या &#8216;बॉडी क्लॉक&#8217; में छिपा है स्ट्रोक से रिकवरी का सीक्रेट&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 06:39:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="893" height="468" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/1-23.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/1-23.jpg 893w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/1-23-768x402.jpg 768w" sizes="(max-width: 893px) 100vw, 893px" />क्या आप जानते हैं कि हमारी नींद और बॉडी क्लॉक किसी गंभीर बीमारी से उबरने में कितनी मददगार हो सकती है? हाल ही में हुए एक नए अध्ययन में एक बहुत ही अच्छी खबर सामने आई है। इस स्टडी के अनुसार, अगर स्ट्रोक के मरीज अपनी बॉडी क्लॉक की रिदम को मजबूत कर लें, तो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="893" height="468" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/1-23.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/1-23.jpg 893w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/1-23-768x402.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 893px) 100vw, 893px" />
<p>क्या आप जानते हैं कि हमारी नींद और बॉडी क्लॉक किसी गंभीर बीमारी से उबरने में कितनी मददगार हो सकती है? हाल ही में हुए एक नए अध्ययन में एक बहुत ही अच्छी खबर सामने आई है।</p>



<p>इस स्टडी के अनुसार, अगर स्ट्रोक के मरीज अपनी बॉडी क्लॉक की रिदम को मजबूत कर लें, तो उनके दिमाग को तेजी से ठीक होने में काफी मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं इस नई रिसर्च में और क्या-क्या अहम खुलासे हुए हैं।</p>



<p><strong>नींद और दिमाग की रिकवरी का खास कनेक्शन<br></strong>‘जर्नल ऑफ क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन’ में प्रकाशित इस नई रिसर्च के मुताबिक, शरीर की प्राकृतिक दैनिक लय को ठीक करके अपनी नींद में सुधार करना एक बेहतरीन उपाय है। यह तरीका स्ट्रोक के बाद दिमाग की रिकवरी को तेज कर सकता है। दरअसल, यह नई रणनीति दिमाग की सफाई को बेहतर बनाने और स्ट्रोक के परिणामों को सुधारने का काम करती है।</p>



<p><strong>कैसे मजबूत करें अपनी बायोलॉजिकल क्लॉक?<br></strong>शोधकर्ताओं ने चूहों पर किए गए परीक्षणों में पाया कि शरीर की जैविक घड़ी को दुरुस्त करने से स्ट्रोक के बाद रिकवरी बेहतर होती है। इसके लिए कुछ खास तरीके अपनाए जा सकते हैं:</p>



<p>सही समय पर रोशनी के संपर्क में रहना।<br>मेलाटोनिन का उपयोग।<br>ऐसी दवाइयों का इस्तेमाल जो सीधा बॉडी क्लॉक पर असर डालती हैं।<br>इन उपायों को अपनाने से स्ट्रोक से पीड़ित चूहों में ठीक होने की रफ्तार में काफी सुधार देखा गया।</p>



<p><strong>दिमाग का ‘कचरा’ साफ करने वाला नेटवर्क<br></strong>रोचेस्टर मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के दौरान एक और अहम बात खोजी। उन्होंने पाया कि बॉडी क्लॉक को मजबूत करने से दिमाग के ‘ग्लिंफैटिक सिस्टम’ में काफी सुधार होता है। आसान भाषा में कहें तो यह सिस्टम हमारे दिमाग का कचरा साफ करने वाला नेटवर्क है।</p>



<p>यह प्रणाली रक्त वाहिकाओं के साथ-साथ और मस्तिष्क के ऊतकों के माध्यम से सेरेब्रोस्पाइनल तरल पदार्थ को स्थानांतरित करने का महत्वपूर्ण काम करती है।</p>



<p><strong>सूजन पैदा करने वाले तत्वों में आई कमी<br></strong>स्ट्रोक के बाद अक्सर दिमाग में कुछ ऐसे मॉलिक्यूल्स बने रह जाते हैं जो सूजन पैदा करते हैं, लेकिन रिसर्च में यह सामने आया कि ग्लिंफैटिक सिस्टम के बेहतर होने से, दिमाग में मौजूद इन सूजन पैदा करने वाले हानिकारक अणुओं के स्तर में भी भारी कमी आती है, जिससे मरीज को जल्द स्वस्थ होने में मदद मिलती है।</p>
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		<title>क्यों पूरी नींद लेने के बाद भी दिनभर टूटता है शरीर?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Jun 2026 05:35:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1107" height="681" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/3-17.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/3-17.jpg 1107w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/3-17-768x472.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1107px) 100vw, 1107px" />एक स्वस्थ शरीर के लिए उम्र के हिसाब से 6 से 8 घंटे की अच्छी क्वालिटी वाली नींद लेना बेहद जरूरी है, लेकिन कई बार रात की नींद पूरी न होने के कारण लोग दिनभर थकावट और जरूरत से ज्यादा नींद आने की समस्या से जूझते रहते हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा अक्सर होता &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="1107" height="681" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/3-17.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/3-17.jpg 1107w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/3-17-768x472.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1107px) 100vw, 1107px" />
<p>एक स्वस्थ शरीर के लिए उम्र के हिसाब से 6 से 8 घंटे की अच्छी क्वालिटी वाली नींद लेना बेहद जरूरी है, लेकिन कई बार रात की नींद पूरी न होने के कारण लोग दिनभर थकावट और जरूरत से ज्यादा नींद आने की समस्या से जूझते रहते हैं।</p>



<p>अगर आपके साथ भी ऐसा अक्सर होता है, तो इसे केवल ‘थकान’ मानकर नजरअंदाज न करें। यह कुछ ऐसी बीमारियों या आदतों का संकेत हो सकता है, जिनकी समय पर जांच होना बहुत जरूरी है। आइए, डॉ. मोनिका महाजन (प्रिंसिपल डायरेक्टर और एचओडी, इंटरनल मेडिसिन, मैक्स अस्पताल – पंचशील पार्क) से डिटेल में जानते हैं इस बारे में।</p>



<p><strong>स्लीप एपनिया</strong><br>अगर आपको जोर-जोर से खर्राटे लेने की आदत है और खासकर अगर आपका वजन ज्यादा है, तो आपको ‘ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया’ की समस्या हो सकती है। इस बीमारी में सोते समय जीभ पीछे की तरफ गिर जाती है और दिमाग के स्लीप सेंटर में गड़बड़ी होने लगती है। इससे दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे हार्ट और ब्लड प्रेशर में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है।</p>



<p>नतीजा यह होता है कि रात में बार-बार नींद टूटती है। रात की नींद इतनी खराब हो जाती है कि इंसान दिन में कुर्सी पर बैठे-बैठे या गाड़ी में सफर करते हुए भी सो जाता है। यह एक गंभीर समस्या है जिसका सीधा संबंध हार्ट अटैक और स्ट्रोक से पाया गया है। अगर आपको ऐसे लक्षण हैं, तो ‘स्लीप स्टडी’ कराना सही रहेगा।</p>



<p><strong>जब बिगड़ जाए ‘बॉडी क्लॉक’<br></strong>जो लोग रात की शिफ्ट में काम करते हैं या अक्सर ट्रैवल करते हैं, उन्हें अक्सर ‘जेट लैग’ और ‘सर्कैडियन रिदम डिसऑर्डर’ का सामना करना पड़ता है। हमारे शरीर की अपनी एक अंदरूनी घड़ी होती है। जब हमारी ‘बॉडी क्लॉक’ और बाहर की रोशनी का समय आपस में मेल नहीं खाते, तो स्लीप-वेक साइकिल पूरी तरह खराब हो जाता है। इसी वजह से दिनभर थकान और नींद हावी रहती है।</p>



<p><strong>खराब स्लीप हाइजीन<br></strong>आपकी रोजमर्रा की कुछ आदतें भी आपकी नींद की क्वालिटी खराब कर सकती हैं:</p>



<p>मोबाइल फोन: रातभर फोन की स्क्रीन पर मैसेज चेक करते रहने से स्लीप साइकिल डिस्टर्ब हो जाता है।<br>खान-पान: रात को सोने से पहले शराब या कॉफी का सेवन करना भी आपकी रातों की नींद उड़ा सकता है।</p>



<p><strong>क्या किसी बीमारी या दवा का है असर?<br></strong>दिन में ज्यादा नींद आने के पीछे केवल अधूरी नींद ही नहीं, बल्कि कई अन्य शारीरिक और बाहरी कारण भी हो सकते हैं:</p>



<p>गंभीर बीमारियां: मोटापा, डायबिटीज, दिल की बीमारियां और थायरॉइड जैसी समस्याओं का सीधा कनेक्शन नींद से है। वृद्धावस्था में ‘पार्किंसंस’ के मरीजों का भी स्लीप साइकिल अक्सर बिगड़ जाता है।<br>खून की कमी: शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है, जिससे इंसान को ज्यादा नींद आती है और थकान बनी रहती है।<br>दवाइयों का साइड इफेक्ट: अपनी दवाइयों की लिस्ट जरूर चेक करें। कुछ एंटी-एलर्जी और डिप्रेशन की दवाइयां ऐसी होती हैं, जो हमारी नींद में रुकावट डालती हैं और दिन में नींद और थकान का कारण बनती हैं।<br>मौसम का असर: मौसम की चरम स्थितियां यानी बहुत ज्यादा कड़ाके की सर्दी या झुलसाने वाली गर्मी भी शरीर में थकान और अत्यधिक नींद पैदा कर सकती हैं।</p>



<p>कुल मिलाकर, दिन में बार-बार नींद आना एक साधारण समस्या भी हो सकती है- जैसे खराब स्लीप हाइजीन या रात की इंसफिशिएंट स्लीप, लेकिन साथ ही यह किसी बड़ी बीमारी जैसे- हीमोग्लोबिन की कमी, थायरॉइड, शुगर या स्लीप एपनिया का अलार्म भी हो सकता है। इसलिए, अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं।</p>
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		<item>
		<title>ब्लड डोनेशन सिर्फ पुण्य का काम नहीं, बल्कि अच्छी सेहत की भी है चाबी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Jun 2026 05:34:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="696" height="363" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/ytiut.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />हमेशा से हम यही सुनते आए हैं कि रक्तदान एक ऐसा निस्वार्थ काम है जिससे दूसरों की जान बचाई जा सकती है। यह बात बिल्कुल सच है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि नियमित रूप से खून देने पर खुद डोनर को भी सेहत के कई शानदार फायदे मिलते हैं? मेदांता हॉस्पिटल, नोएडा के नेफ्रोलॉजिस्ट &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="696" height="363" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/ytiut.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />
<p>हमेशा से हम यही सुनते आए हैं कि रक्तदान एक ऐसा निस्वार्थ काम है जिससे दूसरों की जान बचाई जा सकती है। यह बात बिल्कुल सच है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि नियमित रूप से खून देने पर खुद डोनर को भी सेहत के कई शानदार फायदे मिलते हैं?</p>



<p>मेदांता हॉस्पिटल, नोएडा के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. मनोज कुमार सिंघल के अनुसार, योग्य व्यक्तियों के लिए रक्तदान एक हेल्दी लाइफस्टाइल का बहुत ही जरूरी हिस्सा हो सकता है। आइए, आसान शब्दों में समझते हैं कि नियमित रक्तदान आपके लिए कैसे फायदेमंद है।</p>



<p><strong>हर बार होता है आपका बेसिक हेल्थ चेकअप<br></strong>खून देने से पहले हर व्यक्ति का एक बेसिक हेल्थ चेकअप किया जाता है। इसमें आपका ब्लड प्रेशर, पल्स रेट, शरीर का तापमान और हीमोग्लोबिन का स्तर चेक किया जाता है। कई बार इस रूटीन चेकअप के जरिए सेहत से जुड़ी कुछ ऐसी छिपी हुई समस्याओं का पता चल जाता है, जिन पर शायद आपका कभी ध्यान ही न जाता। इससे आप समय रहते सतर्क हो सकते हैं और डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं।</p>



<p><strong>दिल की सेहत के लिए है फायदेमंद<br></strong>कुछ अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि समय-समय पर रक्तदान करने से शरीर में आयरन का स्तर संतुलित रहता है, जो आपके दिल की सेहत को सपोर्ट करता है। हालांकि, यह भी ध्यान रखें कि रक्तदान अच्छी आदतों, जैसे- नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान और तंबाकू से दूरी का विकल्प नहीं है, लेकिन यह आपकी ओवरऑल हेल्थ को बेहतर जरूर बनाता है।</p>



<p><strong>शरीर तेजी से बनाता है नया खून<br></strong>रक्तदान का एक ऐसा फायदा भी है जिसे अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं- वह है शरीर द्वारा नए खून का निर्माण। जब आप खून दान करते हैं, तो आपकी &#8216;बोन मैरो&#8217; नई रक्त कोशिकाएं बनाने के लिए सक्रिय हो जाती है। एक स्वस्थ इंसान के शरीर में दान किए गए प्लाज्मा की मात्रा 24 से 48 घंटों के भीतर ही वापस बन जाती है, जबकि लाल रक्त कोशिकाओको वापस बनने में कुछ हफ्तों का समय लगता है।</p>



<p><strong>मिलती है मानसिक शांति और घटता है तनाव<br></strong>खून दान करने के सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक फायदे भी हैं। यह जानकर ही मन को एक खास मकसद और सामाजिक जिम्मेदारी का एहसास होता है कि आपका एक दान कई मरीजों (जैसे- एक्सीडेंट के शिकार व्यक्ति, बड़ी सर्जरी वाले मरीज, कैंसर रोगी या खून की पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों) के काम आ सकता है। रिसर्च लगातार यह बताती हैं कि परोपकार के ऐसे काम करने से इमोशनल हेल्थ पर पॉजिटिव असर पड़ता है और तनाव कम होता है।</p>



<p><strong>किडनी की सेहत और जरूरी सावधानियां<br></strong>अगर आप स्वस्थ हैं और खून देने की शर्तें पूरी करते हैं, तो रक्तदान करना सुरक्षित है, लेकिन जिन लोगों को क्रोनिक किडनी रोग, गंभीर एनीमिया या कोई अन्य मेडिकल समस्या है, उन्हें खून देने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। खून देने से पहले और बाद में अच्छी मात्रा में लिक्विड डाइट लेना बहुत जरूरी है, क्योंकि पर्याप्त पानी पीने से शरीर का ब्लड सर्कुलेशन और किडनी का फंक्शन सही तरीके से काम करता है।</p>



<p><strong>जिम्मेदारी से करें रक्तदान<br></strong>इन सभी फायदों के बावजूद, रक्तदान हमेशा पूरी जिम्मेदारी के साथ ही किया जाना चाहिए:</p>



<p>सुनिश्चित करें कि आप रक्तदान की शर्तें पूरी करते हैं।<br>दो बार खून देने के बीच बताए गए समय के अंतर का पूरी तरह पालन करें।<br>अपनी डाइट में आयरन, विटामिन और तरल पदार्थों को भरपूर मात्रा में शामिल करें।</p>



<p>क्षमता से अधिक खून देना या किसी बीमारी के बावजूद खून देना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए इससे बचें।</p>
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		<title>बढ़ते बच्चों की डाइट में आज ही शामिल करें ये सुपरफूड्स</title>
		<link>https://heraldscoop.com/%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%86/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 11:30:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="706" height="408" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/1-13.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सही पोषण बेहद जरूरी होता है, क्योंकि जैसे-जैसे बच्चे बढ़ते हैं, उनके शरीर को भरपूर मात्रा में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, विटामिन और हेल्दी फैट्स की जरूरत होती है। ये पोषक तत्व न सिर्फ हड्डियों, मांसपेशियों और दिमाग के विकास में मदद करते हैं, बल्कि इम्युनिटी को भी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="706" height="408" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/1-13.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />
<p>बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सही पोषण बेहद जरूरी होता है, क्योंकि जैसे-जैसे बच्चे बढ़ते हैं, उनके शरीर को भरपूर मात्रा में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, विटामिन और हेल्दी फैट्स की जरूरत होती है।</p>



<p>ये पोषक तत्व न सिर्फ हड्डियों, मांसपेशियों और दिमाग के विकास में मदद करते हैं, बल्कि इम्युनिटी को भी मजबूत बनाते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा एक्टिव, हेल्दी रहे और उसका दिमाग तेज बने, तो उसके रोज की डाइट में कुछ फूड्स को जरूर शामिल करें। आइए जानें कौन-कौन से हैं ये फूड्स।</p>



<p><strong>बच्चों के लिए विकास के लिए क्या खिलाएं?<br></strong>दूध और डेयरी प्रॉडक्ट्स- दूध, दही और पनीर बच्चों के लिए कैल्शियम और प्रोटीन के बेस्ट सोर्स हैं। ये हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाते हैं और बच्चों की ग्रोथ में अहम भूमिका निभाते हैं।<br>अंडे- अंडों में प्रोटीन, विटामिन-डी, विटामिन-बी12 और हेल्दी फैट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। यह बच्चों की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं और दिमाग के विकास में मदद करते हैं।<br>साबुत अनाज- ब्राउन राइस, ओट्स, दलिया और गेहूं जैसे साबुत अनाज बच्चों को एनर्जी देते हैं। इनमें फाइबर होता है जो पाचन को दुरुस्त रखता है और दिनभर एनर्जी बनाए रखता है।<br>हरी पत्तेदार सब्जियां- पालक, मेथी, सरसों का साग और ब्रोकली जैसे ग्रीन वेजिटेबल्स में आयरन, फोलेट और विटामिन-ए व सी होते हैं। ये आंखों की रोशनी बढ़ाने, ब्लड सेल्स बनाने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।<br>दालें और बीन्स- राजमा, चना, मूंग दाल और मसूर जैसी दालें बच्चों के लिए प्रोटीन, फाइबर और आयरन का अच्छा स्रोत हैं। यह शरीर को एनर्जी देती हैं और ग्रोथ को सपोर्ट करती हैं।<br>मेवे और बीज- बादाम, अखरोट, चिया सीड्स और फ्लैक्स सीड्स में हेल्दी फैट्स, ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन-ई होता है। ये दिमाग की काम करने की क्षमता बढ़ाते हैं।<br>फल- सेब, केला, पपीता, अमरूद और मौसमी जैसे फल विटामिन, मिनरल्स और फाइबर से भरपूर होते हैं। ये बच्चों की स्किन, इम्युनिटी और एनर्जी लेवल को बेहतर बनाते हैं।<br>सब्जियों का सूप और सलाद- रोजाना एक कटोरी सब्जी सूप या सलाद देने से बच्चों को जरूरी विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं। यह उनकी भूख भी बढ़ाता है और पाचन को बेहतर बनाता है।<br>मछली- अगर बच्चा नॉन-वेज खाता है, तो हफ्ते में दो बार मछली देना बहुत फायदेमंद है। इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड दिमागी विकास और आंखों की रोशनी बढ़ाते हैं।<br>घर का बना हेल्दी स्नैक्स- घर पर बने हेल्दी स्नैक्स जैसे रोस्टेड मखाने, मूंग दाल चीला या ओट्स टिक्की दें। ये स्वादिष्ट होने के साथ पोषक भी होते हैं।</p>
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		<title>बार-बार होने वाला सिरदर्द माइग्रेन है या ब्रेन ट्यूमर का संकेत, जाने अंतर?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 05:19:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="704" height="408" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/hjkjh.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />सिरदर्द माइग्रेन का सबसे कॉमन लक्षण है। यही वजह है कि अक्सर होने वाले सिरदर्द को लोग माइग्रेन से जोड़कर देखते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं यह ब्रेन ट्यूमर का भी संकेत हो सकता है? जी हां, दोनों ही स्थितियों मं मरीज को सिरदर्द, उल्टी, रोशनी से परेशानी और धुंधला दिखने जैसी समस्याएं हो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="704" height="408" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/hjkjh.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />
<p>सिरदर्द माइग्रेन का सबसे कॉमन लक्षण है। यही वजह है कि अक्सर होने वाले सिरदर्द को लोग माइग्रेन से जोड़कर देखते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं यह ब्रेन ट्यूमर का भी संकेत हो सकता है? जी हां, दोनों ही स्थितियों मं मरीज को सिरदर्द, उल्टी, रोशनी से परेशानी और धुंधला दिखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।&nbsp;</p>



<p>इसलिए इन दोनों के बीच अंतर समझना जरूरी है। आइए इस वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे पर&nbsp;<em><strong>डॉ. बिपलब दास</strong></em>&nbsp;(डायरेक्टर, न्यूरोलॉजिस्ट एंड इंटरवेंशनल न्यूरोरेडियोलॉजी, बत्रा हॉस्पिटल) से जानते हैं कि माइग्रेन और ब्रेन ट्यूमर के बीच अंतर कैसे पहचानें, ताकि समय पर इलाज मिल सके।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading">माइग्रेन</h3>



<p>माइग्रेन का सिरदर्द अक्सर समय-समय पर आता है। जब माइग्रेन अटैक होता है, तो सिरदर्द के साथ कुछ विजुअल ऑरा भी दिखाई देते हैं। इसमें आंखों के सामने आड़ी-तिरछी लाइन्स दिखाई देना, कुछ देर के लिए अंधापन या आंखों के सामने चमकीली रोशनी दिखना शामिल हैं।&nbsp;</p>



<p>माइग्रेन की सबसे बड़ी पहचान है कि इसका दौरा खत्म होते ही, इसके लक्षण पूरी तरह ठीक हो जाते हैं और मरीज बेहतर महसूस करने लगता है।&nbsp;</p>



<p><strong>ब्रेन ट्यूमर<br></strong>ब्रेन ट्यूमर के मामले में स्थिति बिल्कुल अलग होती है। इसमें होने वाला सिरदर्द समय के साथ बढ़ता जाता है और बार-बार होने लगता है। हफ्तों या महीनों तक यह दर्द लगातार बढ़ता है। ट्यूमर का सिरदर्द अक्सर खांसते समय, आगे झुकते समय या सुबह के वक्त और ज्यादा बढ़ जाता है।</p>



<p>इसके साथ-साथ ब्रेन ट्यूमर के मामले में कुछ न्यूरोलॉजिकल बदलाव भी नजर आते हैं, जो लगातार बने रहते हैं, जैसे- हाथ या पैर में लगातार कमजोरी महसूस होना, बैलेंस बनाने में दिक्कत, अचानक दौरे पड़ना, बोलने में या बात करने में परेशानी, याददाश्त कमजोर होना और आंखों की रोशनी कम होना।</p>



<p><strong>डॉक्टर से सलाह कब है जरूरी?<br></strong>ज्यादातर सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर के कारण नहीं होते, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, अगर आपको अचानक सिरदर्द की समस्या रहने लगी है या सिरदर्द लगातार बढ़ता जा रहा है, तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। खासतौर से अगर सिरदर्द के साथ ऊपर बताए गए लक्षण भी दिखाई दे रहे हों। समय पर डॉक्टर से जांच करवाना बीमारी को शुरुआती स्टेज में पकड़ने के लिए बेहद जरूरी है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>उम्र 30 की, घुटने 60 के? युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है आस्टियोआर्थराइटिस</title>
		<link>https://heraldscoop.com/%e0%a4%89%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0-30-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%9f%e0%a4%a8%e0%a5%87-60-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%ae/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Jun 2026 09:54:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="731" height="410" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/8-8.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/8-8.jpg 731w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/8-8-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 731px) 100vw, 731px" />आस्टियोआर्थराइटिस (गठिया), जिसे लंबे समय से बुढ़ापे में होने वाली टूट-फूट की बीमारी माना जाता रहा है, अब 30 साल के युवाओं को भी तेजी से प्रभावित कर रहा है। इसका मुख्य कारण खराब जीवनशैली, गतिहीन दिनचर्या, मोटापा और वीकेंड वॉरियर (सप्ताह भर निष्क्रिय रहकर वीकेंड पर अचानक भारी वर्कआउट करना) फिटनेस कल्चर है। यह &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="731" height="410" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/8-8.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/8-8.jpg 731w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/8-8-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 731px) 100vw, 731px" />
<p>आस्टियोआर्थराइटिस (गठिया), जिसे लंबे समय से बुढ़ापे में होने वाली टूट-फूट की बीमारी माना जाता रहा है, अब 30 साल के युवाओं को भी तेजी से प्रभावित कर रहा है।</p>



<p>इसका मुख्य कारण खराब जीवनशैली, गतिहीन दिनचर्या, मोटापा और वीकेंड वॉरियर (सप्ताह भर निष्क्रिय रहकर वीकेंड पर अचानक भारी वर्कआउट करना) फिटनेस कल्चर है।</p>



<p>यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय आर्थोपेडिक्स पत्रिका में प्रकाशित समीक्षा में दी गई है। समीक्षा में आस्टियोआर्थराइटिस को एक एकल बीमारी के बजाय एक विविध सिंड्रोम के रूप में पुनः परिभाषित किया गया है, जो विभिन्न जैविक, बायोमैकेनिकल, मेटाबॉलिक, आनुवंशिक और आणविक तंत्रों द्वारा संचालित है।</p>



<p><strong>बीमारी के अलग-अलग कारण<br></strong>15 मई को प्रकाशित एक समीक्षा में आस्टियोआर्थराइटिस को एक ही बीमारी के बजाय कई तरह के बायोलॉजिकल, बायोमैकेनिकल, मेटाबॉलिक, जेनेटिक और मालिक्यूलर कारणों से होने वाला एक मिला-जुला सिंड्रोम बताया गया है। शोध से पता चलता है कि इलाज का पारंपरिक “सबके लिए एक जैसा” तरीका अक्सर इसलिए काम नहीं करता क्योंकि मरीजों में बीमारी के अलग-अलग कारण होते हैं।</p>



<p>दुनिया भर में 50 करोड़ से ज्यादा लोग ओए से पीड़ित हैं, जो कुल आबादी का 7.6 प्रतिशत है। ‘ग्लोबल बर्डन आफ डिजीज’ के अनुमानों में पिछले 30 सालों में इसके मामलों में 132 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और 2050 तक इसमें 60 प्रतिशत और बढ़ोतरी होने का अनुमान है।</p>



<p><strong>कई तरह की स्थितियों का समूह<br></strong>इंद्रप्रस्थ अपोलो हास्पिटल्स में वरिष्ठ सलाहकार आर्थोपेडिक और ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. राजू वैश्य ने कहा, आस्टियोआर्थराइटिस के पीड़ित अक्सर मोटापे और निष्क्रिय जीवनशैली के कारण प्रभावित होते हैं | यह रिसर्च साफ करती है कि आस्टियोआर्थराइटिस कोई एक बीमारी नहीं बल्कि कई तरह की स्थितियों का समूह है।</p>



<p>हर मरीज में विशिष्ट फीनोटाइप की पहचान करके हम सबके लिए एक जैसा इलाज करने के बजाय, कहीं ज्यादा असरदार और मरीज के हिसाब से तय किया गया इलाज दे सकते हैं। समीक्षा में छह रोग उपप्रकारों की पहचान की गई है, जिनमें सूजन, मेटाबालिक और दर्द की संवेदनशीलता के रूप शामिल हैं और उपचार निर्णयों को मार्गदर्शित करने के लिए बायोमार्कर पैनल के साथ एमआरआइ पर आधारित उपकरणों की सिफारिश की गई है ।</p>



<p><strong>दो उदाहरण<br></strong>घुटने में दर्द से पीड़ित 33 वर्षीय आइटी पेशेवर में विटामिन-डी की कमी, बढ़ा हुआ बॉडी मास इंडेक्स व जोड़ों का प्रारंभिक क्षरण पाया गया। मेटाबॉलिक आस्टियोआर्थराइटिस के मामले के तौर पर वजन के कंट्रोल, सप्लीमेंट और सही तरीके से व्यायाम से इलाज करने पर मरीज की हालत में सुधार हुआ।</p>



<p>एक और मामले में घुटने में तेज जलन और दर्द से परेशान और नींद न आने की समस्या से जूझ रही 60 साल की महिला को आम दवाओं से राहत नहीं मिली। आगे की जांच में दर्द के प्रति संवेदनशीलता का प्रकार का पता चला और नसों के दर्द के रास्तों को टारगेट करने वाले न्यूरोमाड्यूलेटर से इलाज करने पर उन्हें आराम मिला।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी से आधा हो जाता है Bladder Cancer का खतरा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 05:37:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="683" height="442" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/1-8.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />क्या आप जानते हैं कि मूत्राशय का कैंसर दुनिया के सबसे खर्चीले और जटिल कैंसर में से एक है? इसके मरीजों के लिए अब एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल और चार अन्य कैंसर सेंटर्स द्वारा किए गए एक महत्वपूर्ण ट्रायल में यह खुलासा हुआ है &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="683" height="442" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/1-8.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />
<p>क्या आप जानते हैं कि मूत्राशय का कैंसर दुनिया के सबसे खर्चीले और जटिल कैंसर में से एक है? इसके मरीजों के लिए अब एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है।</p>



<p>मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल और चार अन्य कैंसर सेंटर्स द्वारा किए गए एक महत्वपूर्ण ट्रायल में यह खुलासा हुआ है कि सर्जरी के बाद अगर मरीज को रेडिएशन थेरेपी दी जाए, तो इस कैंसर के दोबारा लौटने का जोखिम आधे से भी कम हो जाता है। आइए, इस महत्वपूर्ण रिसर्च और इसके नतीजों को आसान भाषा में समझते हैं।</p>



<p><strong>क्या कहता है नया रिसर्च?<br></strong>इस अहम स्टडी को ‘ब्लैडर एडजुवेंट रेडियोथेरेपी’ परीक्षण नाम दिया गया है। इसके शानदार और सकारात्मक नतीजे हाल ही में मशहूर मेडिकल पत्रिका ‘जर्नल ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी’ में प्रकाशित हुए हैं।</p>



<p>शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब मूत्राशय का कैंसर एक बार ठीक होने के बाद शरीर में दोबारा लौटता है, तो इसे हराना बहुत मुश्किल हो जाता है। उस स्थिति में इलाज के विकल्प बेहद सीमित रह जाते हैं और मरीज के जीवित रहने की अवधि भी कम हो जाती है, लेकिन यह नया अध्ययन उम्मीद की किरण लेकर आया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि सर्जरी के बाद दी जाने वाली रेडिएशन थेरेपी कैंसर की वापसी के खतरे को काफी हद तक कम कर देती है। साथ ही, इसके जो भी थोड़े-बहुत साइड इफेक्ट्स होते हैं, उन्हें आसानी से मैनेज किया जा सकता है।</p>



<p><strong>कैसे हुआ ट्रायल और क्या रहे नतीजे?<br></strong>आखिर यह रिसर्च कैसे की गई? इस ट्रायल में कुल 153 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया था, जिनकी मूत्राशय के कैंसर की सर्जरी हाल ही में हुई थी।</p>



<p>ट्रायल के दौरान आधे मरीजों को सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी दी गई।<br>वहीं, बाकी बचे आधे मरीजों को सिर्फ मेडिकल निगरानी में रखा गया।</p>



<p>इसके नतीजे बिल्कुल स्पष्ट थे। जिन मरीजों ने रेडिएशन थेरेपी ली थी, उनमें कैंसर के दोबारा होने का खतरा 50 प्रतिशत से भी ज्यादा कम हो गया। यह ट्रायल इस बात का एक बहुत ही पुख्ता सबूत है कि जिन मरीजों में कैंसर के लौटने का खतरा ज्यादा होता है, उन्हें रेडिएशन थेरेपी देकर बचाया जा सकता है।</p>



<p><strong>एक गंभीर चुनौती है मूत्राशय का कैंसर<br></strong>इस बीमारी की गंभीरता को समझना भी बेहद जरूरी है। मूत्राशय का कैंसर न सिर्फ अपनी पहचान और इलाज के नजरिए से काफी कठिन है, बल्कि यह सबसे खर्चीले कैंसरों में भी गिना जाता है।</p>



<p>दुनिया में 9वां स्थान: यह विश्व स्तर पर पाया जाने वाला नौवां सबसे आम कैंसर है।<br>लाखों लोग हैं पीड़ित: साल 2022 के आंकड़ों की बात करें तो पूरी दुनिया में 6 लाख से ज्यादा लोगों में इस बीमारी की पहचान हुई थी।<br>पुरुषों को ज्यादा खतरा: यह बीमारी मुख्य रूप से पुरुषों को अधिक अपना शिकार बनाती है और उन्हें ज्यादा प्रभावित करती है।</p>



<p>कुल मिलाकर, टाटा मेमोरियल और अन्य सेंटर्स की यह रिसर्च मूत्राशय कैंसर से जंग लड़ रहे मरीजों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है, जो उनके भविष्य के इलाज की दिशा को पूरी तरह से बदल सकती है।</p>
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		<item>
		<title>वायरस-बैक्टीरिया नहीं, खराब आदतें हैं इन 4 बीमारियों की वजह!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 11:31:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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<p>भारत में रहने वाले लोगों की सेहत बहुत तेजी से बदल रही है, जहां एक तरफ बैक्टीरिया और इन्फेक्शन वाली बीमारियों में कमी आई है तो वहीं हमारी रोजमर्रा की आदतों से अब ज्यादा बीमारियां पैदा हो रही हैं। ऐसा हम नहीं बल्कि हाल ही में जारी हुआ नैशनल फैमिली हेल्थ (NFHS-6) सर्वे कह रहा है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर वो कौन सी बीमारियां हैं और उसके लिए हमारी आदतें कैसे जिम्मेदार हैं।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading">खराब जीवनशैली से होने वाली बीमारियां&nbsp;</h3>



<p>यहां ऐसी 4 बीमारियां बताई जा रही हैं जिनका कारण हमारी रोजमर्रा की खराब आदतें हैं :&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading">मोटापा&nbsp;</h3>



<p>शरीर की बढ़ती चर्बी आज एक ऐसी समस्या है जिससे ज्यादातर लोग परेशान हैं। मोटापे की सबसे बड़ी वजह है खूब खाना, उसमें भी घर के बने खाने के बजाय जंक फूड ज्यादा खाना। इससे होता यह है कि शरीर में सूजन बढ़ती चली जाती है और व्यक्ति मोटापे का शिकार हो जाता है। वहीं, कई बार शरीर के बढ़ते फैट के लिए तनाव भी ज़िम्मेदार होता है। जिसकी वजह से स्ट्रेस ईटिंग होने लगती है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading">हाइपरटेंशन&nbsp;</h3>



<p>अब क्योंकि फास्ट फूड का सेवन बढ़ गया है तो इससे हाइपरटेंशन की बीमारी भी लोगों में ज्यादा देखने को मिल रही है। फास्ट फूड में नमक और तेज़ मसाले रक्त में दबाव को बढ़ा देते हैं। वहीं, मानसिक तनाव के चलते भी ब्लड में प्रेशर बढ़ने लगने लगता है और व्यक्ति हाइपरटेंशन की चपेट में आ जाता है।&nbsp;</p>



<p><strong>टाइप 2 डायबिटीज<br></strong>टाइप 2 डायबिटिज का कारण बढ़ता वजन खासकर पेट के हिस्से की बढ़ती चर्बी, शरीर को एक्टिव न रखना, जंक फूड या पैकेट फूड का अधिक सेवन है। कई मामलों में यह बीमारी आनुवंशिक हो सकती है पर ज्यादातर इसकी वजह खराब आदतें ही हैं।</p>



<p><strong>अस्थमा<br></strong>इन दिनों अस्थमा की दिक्कत लोगों में देखने को मिल रही है और इसकी एक वजह स्मोकिंग और तंबाकू का सेवन भी है। वहीं, दूसरी वजह मोटापा है क्योंकि जब शरीर का वजन ज्यादा होता है तो इससे फेफड़ों पर दबाव अधिक बढ़ता है और सांस लेने में परेशानी होने लगती है।</p>



<p>खराब आदतों के चलते होने वाली बीमारियों से बचाव कैसे करें?<br>घर का बना ताज़ा और पोषक तत्वों से भरपूर खाना खाएं।</p>



<p>तनाव से बचने के लिए मेडिटेशन का सहारा लें।</p>



<p>शरीर को फिट रखने के लिए रोजाना एक्सरसाइज करें।</p>



<p>कभी-कभी मसालेदार और ज्यादातर सादा भोजन करें।</p>



<p>स्मोकिंग और तंबाकू से परहेज करें।</p>
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		<title>जानिए लिमिट से ज्यादा पानी पीने से आपके शरीर पर क्या होता है असर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 05:15:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="732" height="406" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/ytgjh.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />अच्छी सेहत के लिए खूब पानी पीने की सलाह दी जाती है, खासकर गर्मी के मौसम में। लेकिन क्या यही पानी हमारी सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकता है?&#160; दरअसल, जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी सेहत के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। जब आप अपने शरीर की जरूरत से बहुत ज्यादा पानी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="732" height="406" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/ytgjh.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />
<p>अच्छी सेहत के लिए खूब पानी पीने की सलाह दी जाती है, खासकर गर्मी के मौसम में। लेकिन क्या यही पानी हमारी सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकता है?&nbsp;</p>



<p>दरअसल, जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी सेहत के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। जब आप अपने शरीर की जरूरत से बहुत ज्यादा पानी पी लेते हैं, तो यह एक गंभीर स्थिति को जन्म देता है जिसे वॉटर इन्टॉक्सिकेशन कहा जाता है। आइए समझते हैं कि ज्यादा पानी पीना कैसे नुकसानदेह हो सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या है वॉटर इन्टॉक्सिकेशन?</h3>



<p>वॉटर इन्टॉक्सिकेशन एक ऐसी स्थिति है जब आपके शरीर में उसकी जरूरत से कहीं ज्यादा पानी इकट्ठा हो जाता है। आमतौर पर, जब हम पानी पीते हैं, तो हमारा शरीर पसीने या यूरीन के जरिए एक्स्ट्रा पानी को बाहर निकाल देता है, लेकिन जब पानी की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है, तो शरीर में एक तरह का इंबैलेंस पैदा हो जाता है। इस स्थिति में शरीर प्राकृतिक रूप से उस एक्स्ट्रा पानी को बाहर नहीं निकाल पाता है।</p>



<p><strong>शरीर पर इसका क्या असर पड़ता है?<br></strong>जब आप बहुत कम समय में बहुत ज्यादा मात्रा में पानी पी लेते हैं, तो इसका सीधा असर आपके खून और सेल्स पर पड़ता है।</p>



<p>सोडियम का स्तर कम होना- जरूरत से ज्यादा पानी आपके खून को पतला कर देता है। इसके कारण शरीर में मौजूद जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा तेजी से घटने लगती है। इसमें सबसे ज्यादा कमी सोडियम के स्तर में आती है। खून में सोडियम का स्तर सामान्य से कम होने की इस स्थिति को हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है।<br>सेल्स में सूजन आना- सोडियम हमारे शरीर में सेल्स के अंदर और बाहर पानी के बैलेंस को बनाए रखने का काम करता है। जब खून में सोडियम का स्तर बहुत कम हो जाता है, तो पानी बैलेंस बनाने के लिए शरीर की सेल्स के अंदर जाने लगता है। नतीजा यह होता है कि शरीर के सेल्स पानी सोखकर फूलने लगते हैं।<br>दिमाग पर होता है असर- शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में दिमाग के सेल्स में सूजन आना सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। पानी की ज्यादा मात्रा के कारण दिमाग के सेल्स में सूजन आती है, तो खोपड़ी के अंदर का दबाव बहुत बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ दबाव दिमाग के काम करने के तरीके को सीधे प्रभावित करता है। इसके कारण व्यक्ति की मानसिक स्थिति बिगड़ने लगती है। मरीज के व्यवहार में बदलाव आने लगता है, उसके होश और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है और शरीर के मूवमेंट पर से कंट्रोल खोने लगता है।</p>
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