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	<title>देश-विदेश &#8211; Herald Scoop | हेराल्ड स्कूप</title>
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	<title>देश-विदेश &#8211; Herald Scoop | हेराल्ड स्कूप</title>
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		<title> 20 हजार करोड़ के दांव से भारत बनेगा का लॉजिस्टिक्स किंग</title>
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		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="805" height="446" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/7-17.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/7-17.jpg 805w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/7-17-768x426.jpg 768w" sizes="(max-width: 805px) 100vw, 805px" />ग्रेट निकोबार परियोजना को भारत के समुद्री व्यापार और रणनीतिक शक्ति के लिए अहम माना जा रहा है। 20,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल भविष्य में 21 मिलियन टीईयू क्षमता तक पहुंच सकता है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल डी.के. जोशी ने गुरुवार को ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="805" height="446" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/7-17.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/7-17.jpg 805w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/7-17-768x426.jpg 768w" sizes="(max-width: 805px) 100vw, 805px" />
<p>ग्रेट निकोबार परियोजना को भारत के समुद्री व्यापार और रणनीतिक शक्ति के लिए अहम माना जा रहा है। 20,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल भविष्य में 21 मिलियन टीईयू क्षमता तक पहुंच सकता है।</p>



<p>अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल डी.के. जोशी ने गुरुवार को ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर पीटीआई से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना भारत के समुद्री व्यापार के लिए गेम-चेंजर साबित होगी और अंडमान-निकोबार को हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करेगी। जोशी की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, परियोजना अब पहले दौर में प्रवेश करने जा रही है और इसका प्रमुख हिस्सा इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT) देश के समुद्री व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देगा।</p>



<p><strong>‘तीन साल में पूरा होगा पहला चरण’<br></strong>उपराज्यपाल जोशी के मुताबिक, ‘पहले चरण में यह टर्मिनल लगभग 6 मिलियन टीईयू (TEU) कार्गो क्षमता संभालने में सक्षम होगा और इसे बनाने पर करीब 20,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी और कार्य शुरू होने के तीन वर्षों के भीतर इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अंतिम चरण में इसकी क्षमता बढ़कर 21 मिलियन टीईयू तक पहुंच सकती है, जिससे यह न केवल भारत बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सबसे बड़े कंटेनर बंदरगाहों में शामिल हो जाएगा। बता दें कि टीईयू कंटेनर जहाजों की कार्गो क्षमता और बंदरगाहों की माल ढुलाई क्षमता मापने की मानकीकृत इकाई है।</p>



<p><strong>पीपीपी मॉ़डल के तहत तैयार किया जा रहा प्रोजेक्ट<br></strong>ग्रेट निकोबार की मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थिति का उल्लेख करते हुए जोशी ने कहा कि यह बंदरगाह वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों पर एक प्रमुख ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में उभर सकता है। अधिकारियों के अनुसार, सार्वजनिक-निजी भागीदारी पीपीपी मॉडल के तहत विकसित की जा रही इस परियोजना में बंदरगाह आधारित विकास के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और आदिवासी समुदायों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जाएगा।</p>



<p><strong>एयरपोर्ट और सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मिलेगा विस्तार<br></strong>बंदरगाह के साथ एक ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी कम से कम एक रनवे के अगले तीन वर्षों में चालू होने की उम्मीद है। इसके अलावा, कैंपबेल बे स्थित नौसैनिक एयर स्टेशन आईएनएस बाज की मौजूदा रनवे को लगभग तीन किलोमीटर तक विस्तारित किया जा रहा है, ताकि बड़े विमानों का संचालन संभव हो सके।</p>



<p><strong>‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को मिलेगी नई गति<br></strong>जोशी ने कहा कि ये सभी पहल भारत के ‘विकसित भारत’ के व्यापक लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद करेंगी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की आर्थिक एवं रणनीतिक महत्ता को मजबूत करेंगी।<br>उन्होंने द्वीप समूह में चल रही अन्य पहलों का भी जिक्र किया, जिनमें कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ कौशल विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन के लिए हुए समझौते शामिल हैं। इनका उद्देश्य जहाज मरम्मत क्षमताओं को बढ़ाना है।</p>



<p><strong>‘जहाज मरम्मत और निर्माण केंद्र के रूप में विकसित होगा क्षेत्र’<br></strong>जोशी ने बताया कि स्वराज द्वीप (पूर्व में हैवलॉक द्वीप) के निकट पोर्ट मीडोज में प्रस्तावित शिप-टू-शिप ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल तथा डिगलीपुर के पास अटलांटा बे में प्रस्तावित गहरे पानी के बहुउद्देश्यीय बंदरगाह जैसी परियोजनाएं ग्रेट निकोबार परियोजना को और मजबूती प्रदान करेंगी। उन्होंने कहा, ‘इन विकास कार्यों के साथ अंडमान सागर में अगले पांच वर्षों के दौरान जहाजरानी गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। इससे यह क्षेत्र पहले जहाज मरम्मत केंद्र और बाद में जहाज निर्माण केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।’ वहीं, अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न परियोजनाओं को लेकर कई अध्ययन जारी हैं और आने वाले वर्षों में इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।</p>



<p><strong>प्रोजेक्ट पर कांग्रेस ने जताई है आपत्ति<br></strong>हालांकि, ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर कुछ पक्षों ने पर्यावरण संबंधी चिंताएं भी जताई हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इस परियोजना से पारिस्थितिक तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचेगा और बड़ी संख्या में प्रवाल (कोरल) कॉलोनियों का विनाश हो सकता है।</p>
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		<title>स्मार्ट पोर्ट्स की दिशा में पहल: आईपीए और अनुवादिनी ए.आई. की रणनीतिक साझेदारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 05:56:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="796" height="564" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/1-26.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/1-26.jpg 796w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/1-26-768x544.jpg 768w" sizes="(max-width: 796px) 100vw, 796px" />भारतीय पत्तन संघ (आई.पी.ए.) और अनुवादिनी ए.आई. ने भारत के पत्तन क्षेत्र में डिजिटल बदलाव को गति देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए. एक ऐतिहासिक समझौता जो देश भर में स्मार्ट, प्रौद्योगिकी-संचालित बंदरगाहों की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता हैडिजिटल नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, भारतीय पत्तन संघ &#8230;]]></description>
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<p>भारतीय पत्तन संघ (आई.पी.ए.) और अनुवादिनी ए.आई. ने भारत के पत्तन क्षेत्र में डिजिटल बदलाव को गति देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए. एक ऐतिहासिक समझौता जो देश भर में स्मार्ट, प्रौद्योगिकी-संचालित बंदरगाहों की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है<br>डिजिटल नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, भारतीय पत्तन संघ (आई.पी.ए.) और अनुवादिनी ए.आई. ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो प्रौद्योगिकी की शक्ति के माध्यम से भारत के पत्तन क्षेत्र को रूपांतरित करने में सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत है।</p>



<p>यह समझौता ज्ञापन भारतीय पत्तन संघ के प्रबंध निदेशक श्री विकास नरवाल, आई.ए.एस., और अनुवादिनी ए.आई. के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बुद्धा चंद्रशेखर के बीच हस्ताक्षरित हुआ। यह साझेदारी आई.पी.ए. की संस्थागत मजबूती और अनुवादिनी ए.आई. की तकनीकी विशेषज्ञता को एक साथ लाकर स्मार्ट बंदरगाह संचालन के एक नए युग की शुरुआत करती है।</p>



<p>इस समझौते की शर्तों के अनुसार, दोनों संगठन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.), बिजनेस इंटेलिजेंस (बी.आई.), डिजिटल इंटेलिजेंस (डी.आई.) और उन्नत अनुवाद प्रौद्योगिकियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। इस साझेदारी में भारत के पत्तन क्षेत्र के लिए विशेष रूप से तैयार प्रशिक्षण कार्यक्रम, सलाहकार सेवाएं और व्यापक डिजिटल रूपांतरण पहलें भी शामिल होंगी।</p>



<p>इस अवसर पर बोलते हुए, भारतीय पत्तन संघ (आई.पी.ए.) के प्रबंध निदेशक श्री विकास नरवाल, आई.ए.एस. ने कहा, “यह समझौता ज्ञापन भारत के बंदरगाहों के आधुनिकीकरण के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अनुवादिनी ए.आई. के साथ साझेदारी करके, हम एक कुशल, बुद्धिमान और भविष्य के लिए तैयार पत्तन तंत्र के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम उठा रहे हैं।”</p>



<p>अनुवादिनी ए.आई. के सीईओ डॉ. बुद्धा चंद्रशेखर ने इस सहयोग पर अपना उत्साह व्यक्त करते हुए कहा, “भारतीय पत्तन संघ के साथ इस परिवर्तनकारी यात्रा में साझेदार बनकर हम सम्मानित महसूस कर रहे हैं। अनुवादिनी ए.आई. भारतीय बंदरगाहों की परिचालन क्षमताओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए ए.आई. और डिजिटल प्रौद्योगिकियों की सर्वोत्तम क्षमताओं का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।”</p>



<p>भारतीय पत्तन संघ (आई.पी.ए.) भारत के सभी प्रमुख बंदरगाहों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक शीर्ष संस्था है। इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से, आई.पी.ए. और अनुवादिनी ए.आई. का लक्ष्य ऐसे समाधान विकसित करना और लागू करना है जो न केवल बंदरगाह की कार्यक्षमता और कार्गो प्रबंधन में सुधार करेंगे, बल्कि उन्नत अनुवाद प्रौद्योगिकियों के माध्यम से भाषा और संवाद की बाधाओं को भी दूर करेंगे, जो एक बहुभाषी और विविधतापूर्ण समुद्री परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण कारक है।</p>



<p>यह सहयोग भारत के वैश्विक समुद्री केंद्र बनने के दृष्टिकोण को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जो राष्ट्रीय समुद्री विकास कार्यक्रम और डिजिटल इंडिया के व्यापक एजेंडे के अनुरूप है।</p>



<p><strong>भारतीय पत्तन संघ (आई.पी.ए.) के बारे में<br></strong>भारतीय पत्तन संघ भारत सरकार द्वारा स्थापित एक शीर्ष संस्था है जो सभी प्रमुख बंदरगाहों के लिए एक साझा मंच के रूप में कार्य करती है। आई.पी.ए. भारत के प्रमुख पत्तन ट्रस्टों में शोध, विकास और नीति समन्वय को सुगम बनाती है, तथा समुद्री क्षेत्र में परिचालन उत्कृष्टता और सतत विकास की दिशा में कार्य करती है।</p>



<p><strong>अनुवादिनी ए.आई. के बारे में<br></strong>अनुवादिनी ए.आई. एक प्रौद्योगिकी-संचालित संगठन है जो ए.आई. अनुवाद प्रौद्योगिकियों और डिजिटल रूपांतरण समाधानों पर केंद्रित है। यह फाउंडेशन समावेशी और कुशल विकास के लिए डिजिटल उपकरणों की क्षमता का उपयोग करने हेतु सरकारी निकायों, संस्थानों और उद्योगों के साथ काम करता है।</p>
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		<item>
		<title>राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी 20 जून को ओडिशा दौरे पर, संताली पवित्र स्थल पर करेंगे पूजा-अर्चना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:18:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="819" height="459" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/5-9.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/5-9.jpg 819w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/5-9-768x430.jpg 768w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/5-9-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 819px) 100vw, 819px" />राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को ओडिशा के मयूरभंज जिले में संताली समुदाय के पवित्र स्थल ‘गोसानी’ में पूजा-अर्चना करेंगे। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी। प्रधानमंत्री राष्ट्रपति मुर्मू के ससुराल वालों के पैतृक गांव पहाड़पुर का दौरा करेंगे। इसके साथ ही राष्ट्रपति के 68वें जन्मदिन पर पारंपरिक संताली अनुष्ठानों में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="819" height="459" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/5-9.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/5-9.jpg 819w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/5-9-768x430.jpg 768w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/5-9-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 819px) 100vw, 819px" />
<p>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को ओडिशा के मयूरभंज जिले में संताली समुदाय के पवित्र स्थल ‘गोसानी’ में पूजा-अर्चना करेंगे। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी। प्रधानमंत्री राष्ट्रपति मुर्मू के ससुराल वालों के पैतृक गांव पहाड़पुर का दौरा करेंगे। इसके साथ ही राष्ट्रपति के 68वें जन्मदिन पर पारंपरिक संताली अनुष्ठानों में भाग लेंगे।</p>



<p><strong>क्या है पूरा कार्यक्रम?<br></strong>उस दिन दोपहर के आसपास मोदी के पहाड़पुर के हेलीपैड पर उतरने और फिर गोसानी जाने की उम्मीद है, जहां वे और मुर्मू प्रार्थना करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री के दौरे से एक दिन पहले, 19 जून को राष्ट्रपति के पास के रायरांगपुर पहुंचने का कार्यक्रम है। पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित और संताली भाषा की शोधकर्ता दमयंती बेशरा के अनुसार, गोसानी एक पूजनीय ग्राम देवता और पूर्वजों की आत्माओं तथा सामुदायिक नेताओं के आध्यात्मिक संरक्षकों का स्थान है।</p>



<p>उन्होंने कहा, ‘संताली लोग नए उद्यम शुरू करने और लंबी यात्राओं से सुरक्षित लौटने की खुशी में गोसानी में मत्था टेकते हैं।’ संताली रीति-रिवाजों के अनुसार, गोसानी परिसर में प्रवेश करने वाले आगंतुक पारंपरिक संताली पोशाक पहनते हैं। यहां तक कि परिसर में आने वाले वर्दीधारी रक्षाकर्मी भी प्रार्थना करने से पहले संताली वस्त्र ओढ़ते हैं।</p>



<p><strong>गोसानी स्थल का क्या है महत्व<br></strong>बेशरा ने कहा कि गोसानी स्थल आम तौर पर या तो गांव के केंद्र में या संताली बस्तियों के प्रवेश द्वार पर स्थित होते हैं और आदिवासी समुदाय के लिए इनका गहरा धार्मिक महत्व है। गोसानी की यात्रा के बाद, मोदी द्वारा मुर्मू के पति और दो बेटों को समर्पित स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने और ग्रामीणों से बातचीत करने की भी उम्मीद है।</p>



<p><strong>मीडिया के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध<br></strong>इस बीच, सरकार ने दोनों नेताओं के दौरे के दौरान गांव में मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। पत्रकारों को भेजे गए एक संदेश में, जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी (डीआई एंड पीआरओ) ने मीडियाकर्मियों से अनुरोध किया कि वे यात्रा के दौरान गांव में न जाएं और न ही प्रवेश करें। इसमें कहा गया है कि जिला खुफिया ब्यूरो की सिफारिशों के बाद यह प्रतिबंध लगाया गया था। इसमें आगे कहा गया है, ‘प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सभी प्रतिनिधियों से अनुरोध है कि वे इस प्रतिबंध पर ध्यान दें और वीवीआईपी यात्रा के सुचारू संचालन और सुरक्षा प्रोटोकॉल के रखरखाव को सुनिश्चित करने में अपना सहयोग दें।’</p>



<p>अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन ने प्रमुख क्षेत्रों को ड्रोन और हवाई उड़ान निषेध क्षेत्र घोषित कर दिया है और यात्रा से पहले व्यापक सुरक्षा उपाय किए हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों के लिए लगभग 5,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे। मुर्मू और मोदी के रायरांगपुर में ओडिशा में भाजपा सरकार की दूसरी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल होने का कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने मंगलवार को इस यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार की चूक को रोकने का निर्देश दिया।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>यूएस-ईरान समझौते के बाद होर्मुज से जल्द निकलेंगे 34 भारतीय जहाज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Jun 2026 10:49:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="435" height="315" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/6-18.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />अमेरिका ईरान समझौते का असर दिखना शुरू हो गया है और होर्मुज पर लगी पाबंदियों में थोड़ी नरमी देखी जा रही है। ऐसे में होर्मुज में फंसे भारत के 34 जहाजों के भी जल्द होर्मुज पार करने की उम्मीद है, जिससे देश के करोड़ों उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="435" height="315" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/6-18.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />
<p>अमेरिका ईरान समझौते का असर दिखना शुरू हो गया है और होर्मुज पर लगी पाबंदियों में थोड़ी नरमी देखी जा रही है। ऐसे में होर्मुज में फंसे भारत के 34 जहाजों के भी जल्द होर्मुज पार करने की उम्मीद है, जिससे देश के करोड़ों उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।</p>



<p>अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की मुक्त आवाजाही सुनिश्चित होगी। इसका असर भी दिखना शुरू हो गया है। दरअसल तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) ला रहे भारतीय टैंकर दिशा ने सुरक्षित होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर लिया है। भारत आ रहे 34 अन्य जहाजों के भी जल्द होर्मुज पार करने की उम्मीद है। ये जहाज पश्चिम एशिया संकट के चलते होर्मुज में फंसे हैं।</p>



<p><strong>करोड़ों किसानों और उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत<br></strong>होर्मुज में फंसे 34 जहाजों में से 16 जहाज ऐसे हैं, जो फर्टिलाइजर लेकर भारत आ रहे हैं। इन 16 जहाजों में से 8 पर यूरिया, चार पर डाइ-अमोनियम फॉस्फेट और तीन पर सल्फर और एक पर अमोनिया लदा है। अगर समझौते के तहत सबकुछ सही रहता है और होर्मुज खुलता है तो जल्द ही भारत के करोड़ों किसानों को खेती के लिए फर्टिलाइजर मिल सकते हैं। हालांकि अभी हालात सामान्य होने में वक्त लग सकता है।</p>



<p><strong>तुरंत पूर्ण राहत के आसार नहीं<br></strong>पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया गया। पश्चिम एशिया की कई अहम रिफाइनरियां और गैस प्लांट हमलों में बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं। जिससे युद्ध समाप्त होने के बाद भी आपूर्ति सामान्य होने में कई महीनों का वक्त लग सकता है। कतर का रास लफ्फान प्लांट हमले में बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुआ है और वहां से ईंधन आपूर्ति सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। भारत के इस गैस प्लांट से एलपीजी आपूर्ति का कॉन्ट्रैक्ट है, ऐसे में हालात सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा।</p>



<p>भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से करीब आधा हिस्सा पश्चिम एशिया से ही आपूर्ति होता है। साथ ही भारत के कुल आयात की 60 प्रतिशत से ज्यादा एलएनजी भी होर्मुज से गुजरकर भारत आती है। यही वजह है कि पश्चिम एशिया संकट के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत को होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो गई। होर्मुज से पार हुआ दिशा टैंकर 18 जून तक भारत आ सकता है और इस पर 62,370 टन एलएनजी है।</p>
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		<title>तमिलनाडु के किसानों को सीएम विजय का तोहफा, 75 हजार रुपये तक का कर्जा माफ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Jun 2026 10:11:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1063" height="621" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/4-8.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/4-8.jpg 1063w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/4-8-768x449.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1063px) 100vw, 1063px" />तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को राज्य के किसानों के लिए एक बहुत बड़ी राहत का एलान किया है। सरकार ने सहकारी बैंकों से लिए गए फसल कर्ज को माफ करने की घोषणा की है। इस फैसले से राज्य के करीब 14.43 लाख किसानों को सीधा फायदा होगा। सरकार के इस कदम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="1063" height="621" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/4-8.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/4-8.jpg 1063w, https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/4-8-768x449.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1063px) 100vw, 1063px" />
<p>तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को राज्य के किसानों के लिए एक बहुत बड़ी राहत का एलान किया है। सरकार ने सहकारी बैंकों से लिए गए फसल कर्ज को माफ करने की घोषणा की है। इस फैसले से राज्य के करीब 14.43 लाख किसानों को सीधा फायदा होगा। सरकार के इस कदम से राज्य के खजाने पर लगभग 6000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, लेकिन इससे किसानों को बहुत बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी</p>



<p><strong>75,000 रुपये तक का कर्ज पूरा माफ<br></strong>बता दें कि सीएम के इस एलान का फायदा ऐसे किसानों को मिलेगा, जिन्होंने 1 मई 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच सहकारी बैंकों से 75000 रुपये तक का फसल कर्ज लिया था। उनका पूरा कर्ज माफ कर दिया जाएगा। इसके अलावा जिन किसानों का कर्ज 75000 रुपये से ज्यादा है, उनके कर्ज में से 35000 रुपये माफ किए जाएंगे।</p>



<p><strong>क्यों बदला गया फैसला?<br></strong>दरअसल, पिछले महीने ही सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों के लिए 50000 रुपये तक के कर्ज माफी की घोषणा की थी। लेकिन किसान संगठनों और किसानों की मांग के बाद मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक के बाद पिछले फैसले को बदलते हुए राहत का दायरा और बढ़ा दिया गया है।</p>



<p><strong>60 दिनों के भीतर मिलेगा फायदा<br></strong>मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के नियमों के मुताबिक, कर्ज माफी की पूरी रकम सरकार को 45 से 60 दिनों के भीतर बैंकों को देनी होगी। सरकार ने कहा कि हालांकि इस समय राज्य की वित्तीय स्थिति (आर्थिक स्थिति) थोड़ी तंग है, इसके बावजूद किसानों की मुश्किलों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने इस संकट की घड़ी में भी लगभग 6000 करोड़ रुपये की कर्ज माफी को मंजूरी दी है।</p>
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		<title>यमुना तट स्वच्छता अभियान: दिल्ली के 28 घाटों पर चला मेगा क्लीनिंग ड्राइव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Jun 2026 11:19:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="645" height="347" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/opupyu.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />यमुना नदी के संरक्षण और जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज आज दिल्ली सरकार द्वारा एक विशाल स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत राजधानी के 28 प्रमुख यमुना घाटों पर एक साथ सफाई का कार्य किया गया, जिसमें हजारों स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस महा-अभियान का नेतृत्व खुद मुख्यमंत्री रेखा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="645" height="347" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/opupyu.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />
<p>यमुना नदी के संरक्षण और जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज आज दिल्ली सरकार द्वारा एक विशाल स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत राजधानी के 28 प्रमुख यमुना घाटों पर एक साथ सफाई का कार्य किया गया, जिसमें हजारों स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।</p>



<p>इस महा-अभियान का नेतृत्व खुद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किया। उन्होंने गीता कॉलोनी के यमुना तट पर पहुंचकर सफाई कार्य में हाथ बंटाया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यमुना का स्वच्छ, निर्मल और अविरल स्वरूप तभी लौटेगा जब इसमें जनभागीदारी सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री के साथ-साथ सरकार के सभी मंत्री, विधायक, पार्टी के नेता और कार्यकर्ता भी स्वयंसेवकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर श्रमदान करते नजर आए।</p>



<p>&#8216;यमुना तट स्वच्छता अभियान&#8217; में 500 से अधिक सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक संगठनों के हजारों स्वयंसेवकों ने महा-श्रमदान किया। इन संगठनों ने न केवल सफाई कार्य में सहयोग दिया, बल्कि नदी संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>



<p>मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस अवसर पर इस बात पर जोर दिया कि सरकार अपना काम पूरी निष्ठा से करेगी, लेकिन यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि नदी को साफ रखने के लिए प्लास्टिक और अन्य कचरे को नदी में फेंकने से बचना होगा और जल संरक्षण के प्रति सचेत रहना होगा।</p>
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		<title>अमेरिकी सांसद श्री थानेदार ने टेक्सस में भारत विरोधी बयानबाजी की निंदा की</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Jun 2026 07:33:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="659" height="398" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/pipo.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />अमेरिकी सांसद थानेदार ने टेक्सस के शहर फ्रिस्को में भारत-विरोधी बयानों की निंदा की और कहा कि प्रवासियों ने अमेरिका को मजबूत बनाया है। खबरों के अनुसार, एक पब्लिक हियरिंग के दौरान इमिग्रेशन और एच-1बी वीजा पर बहस के समय फ्रिस्को पर भारतीयों के कब्जे और भारतीय-अमेरिकी समुदाय को निशाना बनाने जैसी बातें कहीं गईं। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="659" height="398" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/pipo.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />
<p>अमेरिकी सांसद थानेदार ने टेक्सस के शहर फ्रिस्को में भारत-विरोधी बयानों की निंदा की और कहा कि प्रवासियों ने अमेरिका को मजबूत बनाया है।</p>



<p>खबरों के अनुसार, एक पब्लिक हियरिंग के दौरान इमिग्रेशन और एच-1बी वीजा पर बहस के समय फ्रिस्को पर भारतीयों के कब्जे और भारतीय-अमेरिकी समुदाय को निशाना बनाने जैसी बातें कहीं गईं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">&#8216;नस्लवाद के लिए कोई जगह नहीं&#8217;</h3>



<p>थानेदार ने कहा, &#8216;यह नफरत भरी घिनौनी हरकत है। हमारे देश में नस्लवाद के लिए कोई जगह नहीं है।&#8217; हाल ही में, इंटरनेट मीडिया पर फ्रिस्को में एक व्यक्ति द्वारा भारतीय झंडा फाड़ने का वीडियो भी वायरल हुआ था।</p>



<p>फ्रिस्को और टेक्सस के अन्य हिस्सों में भारत-विरोधी बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए थानेदार ने कहा, &#8216;मैं अमेरिकन ड्रीम की तलाश में अमेरिका आया था। मैं खुशकिस्मत रहा कि मुझे शिक्षा मिली, मैंने व्यापार खड़ा किया, हजारों अच्छी नौकरियां पैदा कीं और अब कांग्रेस में अपने समुदाय की सेवा कर रहा हूं।&#8217;</p>



<p>थानेदार ने कहा कि प्रवासी देश को मजबूत बनाते हैं। भारतीय-अमेरिकियों और हर क्षेत्र में उनके अद्भुत टैलेंट का अमेरिकी कहानी में एक खास स्थान है। उन्होंने कहा, &#8216;मुझे भारतीय-अमेरिकी होने पर गर्व है और मैं हमेशा हर तरह की नफरत और नस्लवाद के खिलाफ खड़ा रहूंगा।&#8217;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>डॉक्टर परवीन को मिला ब्रिटेन का प्रतिष्ठित सम्मान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Jun 2026 06:27:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="692" height="402" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/ioytioutuigiygtuuuuuu.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />स्वास्थ्य क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने वाली भारतवंशी डॉक्टर परवीन कुमार को वैश्विक चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में उनके योगदान के लिए ब्रिटेन के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक ‘ग्रैंड क्रास ऑफ द आर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर’ से सम्मानित किया गया है। उन्हें किंग चार्ल्स तृतीय की वार्षिक ‘बर्थडे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="692" height="402" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/ioytioutuigiygtuuuuuu.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />
<p>स्वास्थ्य क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने वाली भारतवंशी डॉक्टर परवीन कुमार को वैश्विक चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में उनके योगदान के लिए ब्रिटेन के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक ‘ग्रैंड क्रास ऑफ द आर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर’ से सम्मानित किया गया है।</p>



<p>उन्हें किंग चार्ल्स तृतीय की वार्षिक ‘बर्थडे आनर्स’ सूची में स्थान दिया गया है। शुक्रवार रात ब्रिटेन के कैबिनेट कार्यालय द्वारा जारी सम्मान सूची में भारतीय मूल के करीब 35 चिकित्सकों, उद्यमियों और सामुदायिक कार्यकर्ताओं को भी स्थान दिया गया।</p>



<p>इस सूची में परवीन कुमार का नाम शामिल है। ‘क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन’ की प्रोफेसर परवीन के सम्मान पत्र में कहा गया, उन्होंने ‘कुमार एंड क्लार्क्स क्लीनिकल मेडिसिन’ नाम की पुस्तक का सह लेखन किया।</p>



<p>‘रायल मेडिकल बेनेवोलेंट फंड’ की अध्यक्ष के तौर पर परवीन ने एक लाख पाउंड जुटाए और मुश्किल में फंसे चिकित्सकों के लिए हेल्पलाइन शुरू करने में मदद की। ‘रायल सोसाइटी ऑफ मेडिसिन’ की अध्यक्ष रहते हुए परवीन ने ‘ग्लोबल हेल्थ’ पहल की शुरुआत की।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नई वर्दी, नई पहचान: भारतीय सेना ने अपनाई बंदी जैकेट, छोड़ी ब्रिटिश परंपरा</title>
		<link>https://heraldscoop.com/%e0%a4%a8%e0%a4%88-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%88-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%b8/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Jun 2026 06:08:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://amarrashtra.com/?p=171269</guid>

					<description><![CDATA[<img width="707" height="394" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/jhgjkhfk.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />भारतीय सेना ने औपनिवेशिक दौर की परंपराओं को खत्म करने के लिए अपनी ड्रेस से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। इसके तहत औपचारिक मौकों पर बंद-गले वाली &#8216;बंदी&#8217; जैकेट पहनने की मंजूरी दी गई है, सेरेमोनियल पाउच बेल्ट को हटाया गया है और परेड के दौरान रिव्यूइंग अधिकारियों के लिए तलवार साथ रखना वैकल्पिक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="707" height="394" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/jhgjkhfk.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />
<p>भारतीय सेना ने औपनिवेशिक दौर की परंपराओं को खत्म करने के लिए अपनी ड्रेस से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। इसके तहत औपचारिक मौकों पर बंद-गले वाली &#8216;बंदी&#8217; जैकेट पहनने की मंजूरी दी गई है, सेरेमोनियल पाउच बेल्ट को हटाया गया है और परेड के दौरान रिव्यूइंग अधिकारियों के लिए तलवार साथ रखना वैकल्पिक कर दिया गया है।</p>



<p>इन बदलावों की जानकारी हाल ही में जारी 174 पेज के मैनुअल &#8216;आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026&#8217; में दी गई है। इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि ऐसा मैनुअल आखिरी बार आठ साल पहले जारी किया गया था।</p>



<h2 class="wp-block-heading">मैनुअल में क्या कहा गया?</h2>



<p>एक न्यूज चैनल और अंग्रेजी समाचार वेबसाइट हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मैनुअल में बताया गया, “देश की भावनाओं और बदलती संप्रभु पहचान को ध्यान में रखते हुए, कई सोच-समझकर किए गए बदलाव शामिल किए गए हैं। कुल मिलाकर, ये बदलाव औपनिवेशिक दौर की बची-खुची निशानियों की प्रगतिशील समीक्षा को दर्शाते हैं, साथ ही भारतीय सेना की गरिमा, कार्यक्षमता और स्थायी परंपराओं को भी बनाए रखते हैं।”</p>



<p>बदलावों के तहत, सेना ने सभी रैंक के सैनिकों के लिए &#8216;3बी&#8217; नाम की एक नई विंटर ड्रेस (सर्दियों की वर्दी) शुरू की है। इसमें अंगोला शर्ट के साथ बैटल जैकेट और बेरेट शामिल है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">यूनिफॉर्म के अलावा क्या बदला?</h2>



<p>यूनिफॉर्म के अलावा नियमों में कर्मचारियों के लुक और ग्रूमिंग से जुड़े कई तरह के स्टैंडर्ड शामिल हैं। जैसे कि टैटू और बॉडी पियर्सिंग से लेकर हेयरकट, मूंछें और कॉस्मेटिक्स का इस्तेमाल।</p>



<p>पहली बार, नियमों में अधिकारियों को फॉर्मल ड्रेस कोड के तौर पर &#8216;बंदी जैकेट&#8217; पहनने की इजाजत दी गई है। यह बंदगला, लाउंज सूट, कॉम्बिनेशन ड्रेस या टाई और फॉर्मल ट्राउजर के साथ फुल-स्लीव शर्ट के अलावा है।</p>



<p>मैनुअल में कहा गया है, “पूरी आस्तीन वाली शर्ट के ऊपर बंद गले का कोट (बंदी जैकेट) पहना जा सकता है। बंदी जैकेट गले पर हुक वाली या बिना हुक वाली हो सकती है (दोनों तरह के डिजाइन मान्य हैं) और इसका रंग सॉलिड और सोबर होना चाहिए। इसके साथ सोबर डिजाइन वाली मैचिंग फॉर्मल ट्राउजर और बंद फॉर्मल जूते पहने जाने चाहिए।”</p>



<h2 class="wp-block-heading">महिलाओं की ड्रेस</h2>



<p>नियमों के तहत महिला अधिकारी सादे रंगों की साड़ियां या दुपट्टे के साथ कुर्ता-सलवार और टखने तक की लंबाई वाली सीधी पैंट पहन सकती हैं। इनमें बिना आस्तीन वाले कुर्ते और पलाजो या सिगरेट पैंट जैसे कैज़ुअल लोअर पहनने पर साफ तौर पर रोक लगाई गई है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">ड्रेस नंबर 5 और 6 में भी बदलाव</h2>



<p>&#8216;मेस ड्रेस नंबर 5&#8217; और &#8216;नंबर 6&#8217; से पाउच बेल्ट हटा दी गई है। आसानी और पहचान के लिए सेना में हर यूनिफॉर्म को एक खास ड्रेस नंबर दिया जाता है। आर्मर्ड कॉर्प्स, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी, राइफल रेजिमेंट्स, मराठा लाइट इन्फैंट्री, जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री और कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स में कर्नल रैंक तक के अधिकारियों के लिए ऐसी बेल्ट अभी भी मान्य हैं।</p>



<p>मैनुअल में कहा गया है, “ड्रेस नंबर 5 और 6 के साथ पाउच बेल्ट नहीं पहनी जाएगी। हालांकि, रेजिमेंट/कोर के कार्यक्रमों के दौरान सेरेमोनियल ड्रेस के साथ इसे पहना जा सकता है।”</p>



<p>ड्रेस नंबर 5 और नंबर 6 पहनने के मौकों में राष्ट्रपति भवन या राजभवन में होने वाले सरकारी कार्यक्रम शामिल हैं। साथ ही, प्रधानमंत्री, तीनों सेना प्रमुखों और सेना कमांडरों के आवास पर होने वाले औपचारिक भोज या स्वागत समारोहों में भी इन्हें पहना जाता है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के सम्मान में आयोजित सरकारी कार्यक्रमों में भी इन्हें पहना जाता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">रॉयल जैसे शब्द भी हटाए गए</h2>



<p>इन नियमों में ‘रॉयल’ जैसे पुराने शब्दों को भी हटा दिया गया है। एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वीपीएस कौशिक ने मैनुअल की प्रस्तावना में कहा है कि यह संस्करण &#8220;औपनिवेशिक दौर की बची-खुची प्रथाओं, साजो-सामान और शब्दावली को धीरे-धीरे हटाकर सेना के पहनावे से जुड़े नियमों को आज की भारतीय सोच के अनुरूप बनाने की दिशा में एक सोच-समझकर उठाया गया कदम है।&#8221;</p>



<p>सेना में स्वदेशीकरण की मुहिम पांच साल पहले तब तेज हुई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया में &#8216;कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस&#8217; को संबोधित किया। उन्होंने सशस्त्र बलों को निर्देश दिया कि वे औपनिवेशिक रीति-रिवाजों को खत्म करें और अपने सिद्धांतों, प्रक्रियाओं और रीति-रिवाजों में भारतीय तौर-तरीकों को अपनाएं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">इन चीजों की मनाही</h2>



<p>&#8216;आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026&#8217; मैनुअल सैनिकों को याद दिलाता है कि टैटू और शरीर पर पियर्सिंग (छेद करवाना) मना है। यूनिफॉर्म में सैनिक किसी भी तरह का ब्रेसलेट नहीं पहन सकते, सिवाय पूजा के दिन कलाई पर बंधे एक पवित्र धागे के। किसी भी तरह के धार्मिक निशान या चिह्न की इजाजत नहीं है, लेकिन सिख सैनिकों के लिए इसमें छूट है।</p>



<p>मूंछें 12 सेमी. से ज्यादा लंबी नहीं होनी चाहिए। सभी कर्मचारियों को यूनिफॉर्म में रहते हुए डिओडोरेंट और परफ्यूम इस्तेमाल करने की मनाही है, हालांकि आफ्टर-शेव लोशन इस्तेमाल करने की इजाजत है।</p>



<p>महिला कर्मियों को कॉस्मेटिक्स से जुड़े कड़े नियमों का पालन करना होता है। लिपस्टिक, रंगीन नेल पॉलिश, बिंदी और नोज पिन लगाने की मनाही है। सिंदूर लगाया जा सकता है, लेकिन बेरेट या पीक कैप पहनने पर वह दिखाई न दे।</p>
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		<title>भारत पर US का दबाव बेअसर, रूस से तेल पर हुई बड़ी डील</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Herald Scoop]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Jun 2026 05:50:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="710" height="386" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/utuyriu.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />वैश्विक प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक दबावों के बावजूद भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल की खरीद और अधिक बढ़ा दी है। यूरोप के थिंक टैंक &#8216;सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर&#8217; (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, मई महीने में भारत ने रूस से करीब 5.8 अरब यूरो (लगभग 6.7 अरब &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="710" height="386" src="https://heraldscoop.com/wp-content/uploads/2026/06/utuyriu.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />
<p>वैश्विक प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक दबावों के बावजूद भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल की खरीद और अधिक बढ़ा दी है। यूरोप के थिंक टैंक &#8216;सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर&#8217; (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, मई महीने में भारत ने रूस से करीब 5.8 अरब यूरो (लगभग 6.7 अरब डॉलर) के जीवाश्म ईंधन का आयात किया, जिससे वह चीन के बाद रूसी ईंधन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है।</p>



<p>रूस से तेल न खरीदने की सलाह देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दबाव को दरकिनार करते हुए भारत ने पिछले महीने के मुकाबले मई में भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में 8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण रूस से होने वाले आयात में आई 21 प्रतिशत की भारी तेजी है।</p>



<p>गुजरात के जामनगर और वाडिनार जैसे बड़े रिफाइनिंग हब के साथ-साथ सरकारी तेल कंपनियों ने भी इस दौरान रूसी कच्चे तेल की आवक को काफी बढ़ाया है। इस महीने रूस से भारत के कुल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी लगभग 83 प्रतिशत थी, जिसका मूल्य 4.8 अरब यूरो था, जबकि तेल उत्पादों और कोयले का आयात क्रमशः 550 मिलियन यूरो और 429 मिलियन यूरो रहा।</p>



<p>भारत के कुछ सबसे बड़े रिफाइनिंग केंद्रों में रूसी कच्चे तेल की आवक में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। गुजरात में वाडिनार रिफाइनरी में अनलोड की गई मात्रा अप्रैल के स्तर से 36 प्रतिशत बढ़ गई, जबकि राज्य में जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में डिलीवरी 14 प्रतिशत बढ़ गई।</p>



<p>CREA के अनुसार, सरकारी रिफाइनरियों ने भी इस साल की शुरुआत में आयात फिर से शुरू करने के बाद खरीदारी बढ़ाई। न्यू मैंगलोर और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों ने, जिन्होंने नवंबर 2025 के अंत में रूसी कच्चे तेल का आयात रोक दिया था, मार्च में खरीदारी फिर से शुरू करने के बाद रूसी तेल खरीदना जारी रखा।</p>



<p>मई में न्यू मैंगलोर में रूसी कच्चे तेल की डिलीवरी महीने-दर-महीने 13 प्रतिशत बढ़ी, जबकि विशाखापत्तनम में आयात में 42 प्रतिशत की उछाल आई। वहीं, ओडिशा के पूर्वी तट पर स्थित पारादीप रिफाइनरी ने भी दो वर्षों में रूसी कच्चे तेल की अपनी सबसे अधिक मात्रा अनलोड की।</p>



<p>यूक्रेन पर मॉस्को के आक्रमण के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों और व्यापार प्रतिबंधों द्वारा वैश्विक ऊर्जा प्रवाह को बदलने के बाद से भारत रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक के रूप में उभरा है। भारतीय रिफाइनरियों ने लगातार रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीदारी बढ़ाई है, जिससे उच्च ऊर्जा लागत की भरपाई करने में मदद मिली है और साथ ही रिफाइनिंग मार्जिन और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा मिला है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">रूस से किसने कितना खरीदा तेल?</h2>



<p>ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के कच्चे तेल के आयात में रूसी तेल का हिस्सा अभी भी काफी बड़ा है, भले ही देश मध्य पूर्व, अफ्रीका और अमेरिका से भी तेल मंगा रहा है। CREA के अनुसार, मई में चीन ने रूस के कच्चे तेल के निर्यात का 50 प्रतिशत हिस्सा खरीदा, इसके बाद भारत (36 प्रतिशत), तुर्की (6 प्रतिशत) और EU (5 प्रतिशत) का स्थान रहा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">चीन द्वारा खरीदे गए ईंधन में अलग-अलग चीजों की हिस्सेदारी</h2>



<p>मई 2026 में चीन दुनिया भर में रूसी जीवाश्म ईंधन का सबसे बड़ा खरीदार बना रहा, जिसने रूस की शीर्ष पांच आयातक देशों से होने वाली कुल कमाई में अकेले 38% (7.0 बिलियन यूरो) का योगदान दिया। चीन की इस कुल खरीद में सबसे बड़ी हिस्सेदारी कच्चे तेल की थी, जो लगभग 69% (4.8 बिलियन यूरो) रही। इसके बाद चीन ने 618 मिलियन यूरो की पाइपलाइन गैस, 525 मिलियन यूरो का कोयला, और 510 मिलियन यूरो की एलएनजी (LNG) खरीदी, जबकि बाकी बचा हुआ 479 मिलियन यूरो का आयात अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का था।</p>



<p>सीआरईए (CREA) के अनुसार, 21 जनवरी 2026 को यूरोपीय संघ (EU) द्वारा रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद, मई 2026 में रूसी तेल का इस्तेमाल करने वाली रिफाइनरियों से 10 तेल जहाजों की खेप EU के बंदरगाहों पर पहुंची। इस दौरान भारत, तुर्की, ब्रुनेई और जॉर्जिया की रिफाइनरियों ने प्रतिबंध लगाने वाले देशों को कुल 641 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद भेजे, जिसमें से करीब 214 मिलियन यूरो के उत्पाद सीधे तौर पर रूसी कच्चे तेल से तैयार किए गए थे।</p>



<p>इन खरीदारों में ऑस्ट्रेलिया (275 मिलियन यूरो), EU (174 मिलियन यूरो), अमेरिका (147 मिलियन यूरो) और न्यूजीलैंड (45 मिलियन यूरो) शामिल थे। अमेरिका को यह निर्यात मुख्य रूप से भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की जामनगर रिफाइनरी और तुर्की की स्टार व तुप्रास इजमित रिफाइनरियों से हुआ।</p>



<p>आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में स्टार रिफाइनरी ने अपने कच्चे तेल का 39% और जामनगर रिफाइनरी ने 15% हिस्सा रूस से मंगवाया था।</p>
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